Navigate to Verse
Currently viewing: Parva 1 -
Chapter 1.147
(24 verses)
Powered by Aksharamukha
Search Mahābhārata
❖ ❖ ❖
Sanskrit Text
अवश्यकरणीयेऽर्थे
मा
त्वां
कालोऽत्यगादयम्
।
त्वया
दत्तेन
तोयेन
भविष्यति
हितं
च
मे
॥
Padaccheda (Word Analysis)
अवश्य + कृ | ऽर्थे | मा | त्वां | कालो | ऽत्यगाद् | अयम्
त्वया | दत्तेन | तोयेन | भविष्यति | हितं | च | मे
त्वया | दत्तेन | तोयेन | भविष्यति | हितं | च | मे