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Currently viewing: Parva 1 -
Chapter 1.147
(24 verses)
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Sanskrit Text
धर्मतोऽहं
परित्याज्या
युवयोर्नात्र
संशयः
।
त्यक्तव्यां
मां
परित्यज्य
त्रातं
सर्वं
मयैकया
॥
Padaccheda (Word Analysis)
धर्मतो | ऽहं | परित्याज्या | युवयोर् | न + अत्र | संशयः
त्यक्तव्यां | मां | परित्यज्य | त्रातं | सर्वं | मद् + एक
त्यक्तव्यां | मां | परित्यज्य | त्रातं | सर्वं | मद् + एक