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Currently viewing: Parva 1 -
Chapter 1.145
(40 verses)
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Sanskrit Text
भर्तुरर्थाय
निक्षिप्तां
न्यासं
धात्रा
महात्मना
।
यस्यां
दौहित्रजाँल्लोकानाशंसे
पितृभिः
सह
।
स्वयमुत्पाद्य
तां
बालां
कथमुत्स्रष्टुमुत्सहे
॥
Padaccheda (Word Analysis)
भर्तुर् | अर्थाय | निक्षिप्तां | न्यासं | धात्रा | महात्मना
यस्यां | दौहित्र + ज | लोकान् | आशंसे | पितृभिः | सह
स्वयम् | उत्पाद्य | तां | बालां | कथम् | उत्स्रष्टुम् | उत्सहे
यस्यां | दौहित्र + ज | लोकान् | आशंसे | पितृभिः | सह
स्वयम् | उत्पाद्य | तां | बालां | कथम् | उत्स्रष्टुम् | उत्सहे