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Currently viewing: Parva 1 -
Chapter 1.145
(40 verses)
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Sanskrit Text
सोऽयं
ते
बन्धुकामाया
अशृण्वन्त्या
वचो
मम
।
बन्धुप्रणाशः
संप्राप्तो
भृशं
दुःखकरो
मम
॥
Padaccheda (Word Analysis)
सो | ऽयं | ते | बन्धु + कामा | अशृण्वन्त्या | वचो | मम
बन्धु + प्रणाश | सम्प्राप्तो | भृशं | दुःख + कर | मम
बन्धु + प्रणाश | सम्प्राप्तो | भृशं | दुःख + कर | मम