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Currently viewing: Parva 1 -
Chapter 1.145
(40 verses)
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Sanskrit Text
अन्तःपुरं
ततस्तस्य
ब्राह्मणस्य
महात्मनः
।
विवेश
कुन्ती
त्वरिता
बद्धवत्सेव
सौरभी
॥
Padaccheda (Word Analysis)
एवम् | वच् + तदा | कर्णो | ब्राह्मणेन | महात्मनः
विवेश | कुन्ती | त्वरिता | बन्ध् + वत्स + इव | सौरभी
विवेश | कुन्ती | त्वरिता | बन्ध् + वत्स + इव | सौरभी