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Currently viewing: Parva 1 -
Chapter 1.139
(32 verses)
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Sanskrit Text
भ्रातुर्वचनमाज्ञाय
त्वरमाणेव
राक्षसी
।
जगाम
तत्र
यत्र
स्म
पाण्डवा
भरतर्षभ
॥
Padaccheda (Word Analysis)
भ्रातुर् | वचनम् | आज्ञाय | त्वर् + इव | राक्षसी
जगाम | तत्र | यत्र | स्म | रुवन्ति | जलचारिणः
जगाम | तत्र | यत्र | स्म | रुवन्ति | जलचारिणः