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Currently viewing: Parva 1 -
Chapter 1.138
(31 verses)
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Sanskrit Text
ततो
भीमो
वनं
घोरं
प्रविश्य
विजनं
महत्
।
न्यग्रोधं
विपुलच्छायं
रमणीयमुपाद्रवत्
॥
Padaccheda (Word Analysis)
ततो | भीमो | वनं | घोरं | प्रविश्य | विजनं | महत्
न्यग्रोधं | विपुल + छाया | रमणीयम् | उपाद्रवत्
न्यग्रोधं | विपुल + छाया | रमणीयम् | उपाद्रवत्