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Currently viewing: Parva 1 -
Chapter 1.127
(24 verses)
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Sanskrit Text
कुन्त्याश्च
प्रत्यभिज्ञाय
दिव्यलक्षणसूचितम्
।
पुत्रमङ्गेश्वरं
स्नेहाच्छन्ना
प्रीतिरवर्धत
॥
Padaccheda (Word Analysis)
कुन्ती + च | प्रत्यभिज्ञाय | दिव्य + लक्षण + सूचय्
पुत्रम् | अङ्ग + ईश्वर | स्नेह + छद् | प्रीतिर् | अवर्धत
पुत्रम् | अङ्ग + ईश्वर | स्नेह + छद् | प्रीतिर् | अवर्धत