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Currently viewing: Parva 1 -
Chapter 1.127
(24 verses)
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Sanskrit Text
सकुण्डलं
सकवचं
दिव्यलक्षणलक्षितम्
।
कथमादित्यसंकाशं
मृगी
व्याघ्रं
जनिष्यति
॥
Padaccheda (Word Analysis)
स + कुण्डल | स + कवच | दिव्य + लक्षण + लक्षय्
कथम् | आदित्य + संकाश | मृगी | व्याघ्रं | जनिष्यति
कथम् | आदित्य + संकाश | मृगी | व्याघ्रं | जनिष्यति