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Currently viewing: Parva 1 -
Chapter 1.126
(39 verses)
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Sanskrit Text
ततस्तस्मिन्क्षणे
कर्णः
सलाजकुसुमैर्घटैः
।
काञ्चनैः
काञ्चने
पीठे
मन्त्रविद्भिर्महारथः
।
अभिषिक्तोऽङ्गराज्ये
स
श्रिया
युक्तो
महाबलः
॥
Padaccheda (Word Analysis)
ततस् + तद् | क्षणे | कर्णः | स + लाज + कुसुम | घटैः
काञ्चनैः | काञ्चने | पीठे | मन्त्र + विद् | महत् + रथ
अभिषिक्तो | अङ्ग + राज्य | स | श्रिया | युक्तो | महत् + बल
काञ्चनैः | काञ्चने | पीठे | मन्त्र + विद् | महत् + रथ
अभिषिक्तो | अङ्ग + राज्य | स | श्रिया | युक्तो | महत् + बल