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Currently viewing: Parva 1 -
Chapter 1.125
(32 verses)
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Sanskrit Text
ततो
रङ्गाङ्गणगतो
द्रोणो
वचनमब्रवीत्
।
निवार्य
वादित्रगणं
महामेघनिभस्वनम्
॥
Padaccheda (Word Analysis)
प्रतिगृह्य | च | तान् | सर्वान् | द्रोणो | वचनम् | अब्रवीत्
निवार्य | वादित्र + गण | महत् + मेघ + निभ + स्वन
निवार्य | वादित्र + गण | महत् + मेघ + निभ + स्वन