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Currently viewing: Parva 1 -
Chapter 1.125
(32 verses)
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Sanskrit Text
धन्योऽस्म्यनुगृहीतोऽस्मि
रक्षितोऽस्मि
महामते
।
पृथारणिसमुद्भूतैस्त्रिभिः
पाण्डववह्निभिः
॥
Padaccheda (Word Analysis)
धन्यो | अस् + अनुग्रह् | ऽस्मि | त्वं | नो | धात्री | कुलस्य | हि
पृथारणि + समुद्भू + त्रि | पाण्डव + वह्नि
पृथारणि + समुद्भू + त्रि | पाण्डव + वह्नि