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Currently viewing: Parva 1 -
Chapter 1.125
(32 verses)
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Sanskrit Text
स
तैस्तदा
भ्रातृभिरुद्यतायुधै;र्वृतो
गदापाणिरवस्थितैः
स्थितः
।
बभौ
यथा
दानवसंक्षये
पुरा;
पुरंदरो
देवगणैः
समावृतः
॥
Padaccheda (Word Analysis)
स | तद् + तदा | भ्रातृभिर् | उद्यम् + आयुध | वृतो | गदा + पाणि | अवस्थितैः | स्थितः
बभौ | यथा | दानव + संक्षय | पुरा | पुरंदरो | देव + गण | समावृतः
बभौ | यथा | दानव + संक्षय | पुरा | पुरंदरो | देव + गण | समावृतः