Navigate to Verse
Currently viewing: Parva 1 -
Chapter 1.123
(78 verses)
Powered by Aksharamukha
Search Mahābhārata
❖ ❖ ❖
Sanskrit Text
स
समर्थोऽपि
मोक्षाय
शिष्यान्सर्वानचोदयत्
।
ग्राहं
हत्वा
मोक्षयध्वं
मामिति
त्वरयन्निव
॥
Padaccheda (Word Analysis)
स | समर्थो | ऽपि | मोक्षाय | शिष्यान् | सर्वान् | अचोदयत्
ग्राहं | हत्वा | मोक्षयध्वं | माम् | इति | त्वरयन्न् | इव
ग्राहं | हत्वा | मोक्षयध्वं | माम् | इति | त्वरयन्न् | इव