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Chapter 1.123
(78 verses)
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Sanskrit Text
मद्वाक्यसमकालं
ते
मोक्तव्योऽत्र
भवेच्छरः
।
वितत्य
कार्मुकं
पुत्र
तिष्ठ
तावन्मुहूर्तकम्
॥
Padaccheda (Word Analysis)
मद् + वाक्य + सम + काल | ते | मोक्तव्यो | ऽत्र | भू + शर
वितत्य | कार्मुकं | पुत्र | तिष्ठ | तावन् | मुहूर्तकम्
वितत्य | कार्मुकं | पुत्र | तिष्ठ | तावन् | मुहूर्तकम्