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Currently viewing: Parva 1 -
Chapter 1.123
(78 verses)
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Sanskrit Text
अर्जुनस्तु
परं
यत्नमातस्थे
गुरुपूजने
।
अस्त्रे
च
परमं
योगं
प्रियो
द्रोणस्य
चाभवत्
॥
Padaccheda (Word Analysis)
अर्जुन + तु | परं | यत्नम् | आतस्थे | गुरु + पूजन
अस्त्रे | च | परमं | योगं | प्रियो | द्रोणस्य | च + भू
अस्त्रे | च | परमं | योगं | प्रियो | द्रोणस्य | च + भू