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Currently viewing: Parva 1 -
Chapter 1.118
(30 verses)
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Sanskrit Text
तां
प्रेक्ष्य
पतितामार्तां
पौरजानपदो
जनः
।
रुरोद
सस्वनं
सर्वो
राजभक्त्या
कृपान्वितः
॥
Padaccheda (Word Analysis)
तां | प्रेक्ष्य | पतिताम् | आर्तां | पौर + जानपद | जनः
रुरोद | स + स्वन | सर्वो | राजन् + भक्ति | कृपा + अन्वित
रुरोद | स + स्वन | सर्वो | राजन् + भक्ति | कृपा + अन्वित