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Currently viewing: Parva 1 -
Chapter 1.110
(45 verses)
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Sanskrit Text
निशम्य
वचनं
भर्तुर्वनवासे
धृतात्मनः
।
तत्समं
वचनं
कुन्ती
माद्री
च
समभाषताम्
॥
Padaccheda (Word Analysis)
निशम्य | वचनं | भर्तुर् | वन + वास | धृ + आत्मन्
अवेक्षमाणः | कुन्तीं | च | माद्रीं | च | समभाषत
अवेक्षमाणः | कुन्तीं | च | माद्रीं | च | समभाषत