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Currently viewing: Parva 1 -
Chapter 1.110
(45 verses)
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Sanskrit Text
सत्कृतोऽसक्तृतो
वापि
योऽन्यां
कृपणचक्षुषा
।
उपैति
वृत्तिं
कामात्मा
स
शुनां
वर्तते
पथि
॥
Padaccheda (Word Analysis)
सत्कृतो | अ + सत्कृ | वा + अपि | यो | ऽन्यां | कृपण + चक्षुस्
उपैति | वृत्तिं | काम + आत्मन् | स | शुनां | वर्तते | पथि
उपैति | वृत्तिं | काम + आत्मन् | स | शुनां | वर्तते | पथि