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Currently viewing: Parva 1 -
Chapter 1.109
(31 verses)
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Sanskrit Text
किं
कृतं
ते
नरश्रेष्ठ
निघ्नतो
मामनागसम्
।
मुनिं
मूलफलाहारं
मृगवेषधरं
नृप
।
वसमानमरण्येषु
नित्यं
शमपरायणम्
॥
Padaccheda (Word Analysis)
किं | कृतं | ते | नर + श्रेष्ठ | निघ्नतो | माम् | अनागसम्
मुनिं | मूल + फल + आहार | मृग + वेष + धर | नृप
वसमानम् | अरण्येषु | नित्यं | शम + परायण
मुनिं | मूल + फल + आहार | मृग + वेष + धर | नृप
वसमानम् | अरण्येषु | नित्यं | शम + परायण