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Currently viewing: Parva 1 -
Chapter 1.109
(31 verses)
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Sanskrit Text
सर्वभूतहिते
काले
सर्वभूतेप्सिते
तथा
।
को
हि
विद्वान्मृगं
हन्याच्चरन्तं
मैथुनं
वने
।
पुरुषार्थफलं
कान्तं
यत्त्वया
वितथं
कृतम्
॥
Padaccheda (Word Analysis)
यस्मात् | त्वम् | ईदृशे | काले | सर्व + भूत + ईप्सय् | सति
को | हि | विद्वान् | मृगं | हन् + चर् | मैथुनं | वने
पुरुष + अर्थ + फल | कान्तं | यत् | त्वया | वितथं | कृतम्
को | हि | विद्वान् | मृगं | हन् + चर् | मैथुनं | वने
पुरुष + अर्थ + फल | कान्तं | यत् | त्वया | वितथं | कृतम्