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Currently viewing: Parva 1 -
Chapter 1.105
(27 verses)
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Sanskrit Text
सिंहोरस्कं
गजस्कन्धमृषभाक्षं
मनस्विनम्
।
पाण्डुं
दृष्ट्वा
नरव्याघ्रं
व्यस्मयन्त
नरा
भुवि
॥
Padaccheda (Word Analysis)
सिंह + दंष्ट्र | गज + स्कन्ध | ऋषभ + अक्ष | महत् + बल
पाण्डुं | दृष्ट्वा | नर + व्याघ्र | व्यस्मयन्त | नरा | भुवि
पाण्डुं | दृष्ट्वा | नर + व्याघ्र | व्यस्मयन्त | नरा | भुवि